Saturday, May 21, 2016

अकबर ने किया था तुलसीदास जी को जेल में बंद तब लिखी थी हनुमान चलीसा

ये माना जाता था की तुलसीदास जी  के पास बहुत सी चमत्कारी शक्तियां थीं । एक बार एक मरे हुए ब्राह्मण को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था और उसी रास्ते से तुलसीदास जी भी जा रहे थे तभी विधवा औरत ने तुलसीदास जी के पैरों पे गिर पड़ी और प्रणाम किया, तुलसीदास जी ने उस औरत को "सदासौभाग्यावती " होने का आशीर्वाद दिया, औरत ने कहा मैं सदासौभाग्यावती कैसे हो सकती है मेरे पति अभी मर गए हैं, तुलसीदास ने कहा ये शब्द तो निकल चुके हैं अब इसे जीवित करना पड़ेगा। तुलसीदास जी ने फिर सबसे अपनी आँखे बंद करने को कहा और राम नाम जपने लगे, जिससे वो ब्राह्मण फिर से जी गया।


तुलसीदास की ख्याति से अभिभूत होकर अकबर ने तुलसीदास को अपने दरबार में बुलाया और अपने किसी मरे आदमी को ज़िंदा करने को कहा, परन्तु यह प्रदर्शन-प्रियता तुलसीदास की प्रकृति और प्रवृत्ति के प्रतिकूल थी, अकबर ने उनसे जबरदस्ती चमत्कार दिखाने पर विवश किया, लेकिन ऐसा करने से उन्होंने इनकार कर दिया, फलस्वरूप अकबर ने  तुलसीदास को फतेहपुर सिकरी जेल में कैद करवा दिया।



अकबर  के समक्ष झुकने के विपरीत तुलसीदास जी ने हनुमान जी का नाम लिया और हनुमान चालीसा जेल  में ही 40 दिनों में लिख दिया।  तदुपरांत बंदरों की सेना ने किले पे चढ़ाई कर दी, राजधानी और राजमहल में अभूतपूर्व एवं अद्भुत उपद्रव शुरु हो गया।  घरों में घुसकर सबको मरने लगे,  सैनिकों और द्वारपालों को नोचने लगे,  ईंटों को तोड़ने लगे, और सबको उसी ईंट से मारते थे, भयंकर उपद्रव देखने को मिला, सभी बुरी तरह भयभीत हो गए।  अकबर को बताया गया कि यह हनुमान जी का क्रोध है, अकबर को  विवश होकर तुलसीदास जी को मुक्त कर देना पड़ा, उनसे माफ़ी मांगी और आग्रह किया के किले और राजधानी को बंदरों से मुक्त कराएं।

इसके बाद अकबर तुलसीदास जी के मित्र बन गए और फरमान दिया की  उनके राज में राम - हनुमान भक्तों, और दूसरे हिन्दुओं को परेशान नहीं किया जायेगा।


In English-

Tulsidas is attributed with the power of working miracles. In one such miracle, he is believed to have brought back a dead Brahmin to life. While the Brahmin was being taken for cremation, his widow bowed down to Tulsidas on the way who addressed her as Saubhagyavati (a woman whose husband is alive).The widow told Tulsidas her husband had just died, so his words could not be true Tulsidas said that the word has passed his lips and so he would restore the dead man to life. He asked everybody present to close their eyes and utter the name of Rama, on doing which the dead Brahmin was raised back to life.

In another miracle described by Priyadas, the emperor of Delhi, Akbar summoned Tulsidas on hearing of his bringing back a dead man to life. Tulsidas declined to go as he was too engrossed in creating his verses but he was later forcibly brought before the Akbar and was asked to perform a miracle, which Tulsidas declined by saying "It's a lie, all I know is Rama." The emperor imprisoned Tulsidas at Fatehpur Sikri, "We will see this Rama." Tulsidas refused to bow to Akbar and created a verse in praise of Hanuman and chanted it ( Hanuman Chalisa ) for forty days and suddenly an army of monkeys descended upon the town and wreaked havoc in all corners of Fatehpur Sikri, entering each home and the emperor's harem, scratching people and throwing bricks from ramparts. An old Hafiz told the emperor that this was the miracle of the imprisoned Fakir. The emperor fell at Tulsidas' feet, released him and apologised. Tulsidas stopped the menace of monkeys and asked the emperor to abandon the place. The emperor agreed and moved back to Delhi. Ever since Akbar became a close friend of Tulsidas and he also ordered a firman that followers of Rama, Hanuman & other Hindus, should not be harassed in his kingdom.




Source: Wikipedia

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