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श्री राम दरबार



श्रीरामचरितमानस - SHRIRAMCHARITMANAS              


         

           

गोस्वामी तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस भारतीय संस्कृति मे एक विशेष स्थान रखती है। वैसे तो श्रीरामचरितमानस के बहुत सारे संस्करण इन्टरनैट पर दिख जायेंगे, परन्तु मैंने यंहा पे सम्पूर्ण रामायण एकत्रित करने का प्रयास किया है।

रामराज्यवासी त्वम्,प्रोच्छ्रयस्व ते शिरम्, 
न्यायार्थ युद्धस्व,सर्वेषु सम चर। 
परिपालय दुर्बलम्,विद्धि धर्मं वरम्
प्रोच्छ्रयस्व ते शिरम्, रामराज्यवासी त्वम्||

भावार्थ-तुम रामराज्य वासी,अपना मस्तक उँचा रखो,
न्याय के लिए लडो,सबको समान मानो|
कमजोर की रक्षा करो,धर्म को सबसे उँचा जानो
अपना मस्तक उँचा रखो,तुम रामराज्य के वासी हो||

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